Home Society अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं ने लिया स्मार्ट विलेज बसवाने...

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं ने लिया स्मार्ट विलेज बसवाने की शपथ

237
Image Credit: President Jai Kisan Andolan (Delhi Dehat)

वर्तमान समय में भारत की मात्र 28 फीसदी जनसंख्या शहरों में रहती है। फिर भी देश शहरीकरण की गंभीर समस्या का सामना कर रहा है। देश के चार बड़े महानगर दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, और कोलकत्ता आये दिन जल-आपूर्ति, बाढ़, जल-निकासी, स्लम और वायु-प्रदूषण जैसी दिक्कतों के कारण चर्चा में बने रहते हैं। आज दिल्ली की 97.50 फीसदी जन-संख्या शहर में और मात्र 2.50 फीसदी जनसंख्या गाँव में रहती है। देश के अन्य क्षेत्रों की तरह यहाँ भी ग्रामीण जन-संख्या की आजीविका का मुख्य साधन खेती ही है। ऐसे में केंद्र सरकार के समक्ष अपनी शहरी जन-संख्या को आवासीय सुविधा व शुद्ध वायु मूअसर कराने और ग्रामीण जनसंख्या की आजीवाका को बचाये रखने की एक  बड़ी चुनौती है। एक अनुमान के अनुसार 2030-31 तक देश की आधी जनसंख्या शहरों की तरफ आने वाली है। स्पष्ट है इस बड़ी आबादी के आने के बाद देश के अन्य शहरों के अलावा दिल्ली के उपलब्ध संसाधनों पर भारी दबाव होगा। इस सिलसिले में लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत केंद्र सरकार ने दिल्ली के 104 गाँव को चिन्हित करके दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए ) को निर्माण कार्य हेतु हरी झंडी तो दिखा दी है। लेकिन सरकार का ये कदम दिल्ली देहात को बर्बादी की दिशा में ले जाता प्रतीत होता है। भारतीय संविधान किसी को बर्बाद कर किसी को आबाद करने की इजाजत नहीं देता है। आज दिल्ली देहात के स्त्री, पुरुष, बूढ़े और नौजवान सब में अपने भविष्य के संकट को लेकर एक सुगबुगाहट और झटपटाहट स्पष्ट नजर आ रही है।

संवैधानिक उलझन

Image Credit: President Jai Kisan Andolan (Delhi Dehat)

ऐसे तो भूमि राज्य का मामला है। हर प्रदेश सरकार भूमि संबंधी मामले को अपने स्तर से निपटती है। दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा न होने से यहाँ भूमि का मामला देश के अन्य राज्यों से थोड़ा अलग और जटिल है। अभी तक दिल्ली में भूमि संबंधी जो कानून हैं वो जमीन की खरीद-बिक्री और स्वामित्व को नियंत्रि करते ज्यादा नजर आते हैं। दिल्ली भूमि सुधार कानून,1954 के धारा 33 के तहत अपनी जमीन को बेचने, हस्तांतरित करने, किसी को उपहार देने के लिए 8 एकड़ जमीन होना अनिवार्य था जो बाद में संशोधित करके 5 एकड़ सीमित कर दिया गया। इस बदले स्वरूप में भी किसान समुदाय का एक बड़ा हिस्सा इस नीति के लाभ से वंचित रह जाता है।  किसानों का कहना है कि दिल्ली देश की राष्ट्रीय राजधानी है और इसकी आवासीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुये नियोजित तरीके से दिल्ली को बसाना समय की मांग है। लेकिन किसानों को अपनी आने वाली पीढ़ियों की आजीविका और आवासीय सुविधा की चिंता भी है। सरकार पिछले 70 साल से दिल्ली में आबादी की भूमि (लाल डोरा) के क्षेत्रफल में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। दिल्ली सरकार अपने वादा के बावजूद भी सत्ता में आने के बाद लाल डोरा के मुद्दे पर बोलना उचित नहीं समझा। परिणाम स्वरूप आज जमीन होते हुये भी ये किसान अपने परिवार के सदस्यों के लिए आवासीय सुविधा उपलब्ध नहीं करा पाते हैं। ये दिल्ली देहात के लोगों के मौलिक अधिकार से जुड़ा मुद्दा है। समानता के मौलिक अधिकार के तहत इनको को बेहतर आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने की ज़िम्मेदारी सरकार की ही है। इसको लेकर दिल्ली देहात के किसान परेशान हैं। अब तक तो उनकी पीढ़ियाँ खेती करके अपनी आजीविका की व्यवस्था कर लेती थी। जब पुश्तैनी/दादा लाई जमीन उनके अधिकार से निकल जायेगी तो किसान और किसानों की आने वाली पीढ़ियाँ अपनी जीविका उपार्जन कैसे करेगी? ये एक बड़ी समस्या किसानों के सामने विकराल रूप में खड़ी है। इस समस्या का संबंध भी जीने के मौलिक अधिकार से है। आखिर ये लोग भी इसी देश का सम्मानित नागरिक हैं। जितना देश के अन्य नागरिकों के संबंध में सरकार चिंतित है, सरकार को दिल्ली देहात के संदर्भ में भी उतना ही चिंतित और सजग होने की जरूरत है क्योंकि अन्य लोगों की तरह इनका भी स्वतन्त्रता, समानता, आजीविका, और जीवन का मौलिक अधिकार महत्व रखते हैं ।

लैंड पूलिंग पॉलिसी के दुष्प्रभाव से बचने के जनप्रयास

Image Credit: President Jai Kisan Andolan (Delhi Dehat)

अभी हाल में मिली किसान आंदोलन की सफलता के कारण देश के किसानों में जन-संघर्ष के प्रति विश्वास बढ़ा है। इसे दिल्ली देहात के लोगों की सक्रियता के माध्यम से समझा जा सकता है। जय किसान आंदोलन के बैनर तले पिछले कई महीनों से दिल्ली देहात के गाँव गाँव में किसान चौपाल और जन-सभा के माध्यम से लैंड पूलिंग पॉलिसी के दुष्प्रभाव के संदर्भ में एक जागरूकता अभियान चल रहा था। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सैंकड़ों की संख्या में महिलाओं ने लैंड पूलिंग से प्रभावित हर गाँव में महिला चौपाल के आयोजन की घोषणा की और लैंड पूलिंग विषय पर महिला चौपाल में डीडीए की लैंड पूलिंग पॉलिसी में दिल्ली देहात के गाँवों और किसानों के साथ हो रहे अन्याय को रेखांकित करते हुए अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए स्मार्ट विलेज बसवाने की सामूहिक शपथ ली। इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जय किसान आंदोलन के इस मुहिम में मातृ-शक्ति का समायोजन हो गया। अपनी घरेलू व्यस्तता के बावजूद वहाँ उपस्थित महिलाओं ने  महिला चौपाल में कैसे डीडीए द्वारा किसानों का रजिस्ट्रेशन कराने व डीडीए के अधिकारी द्वारा कानून बदलकर किसानों की जमीन जबरन लेने की भी चर्चा की। अब महिलाओं को इस बात का आभास हो गया है कि डीडीए की ये लैंड पूलिंग पॉलिसी दिल्ली देहात को स्लम में तब्दील करने की साजिश व मातृ शक्ति की गरिमा पर हमला है। उन्होंने प्राशसन को चेताया कि दिल्ली देहात की महिलाओं को कोई कमजोर न समझे, वो अपने भावी पीढ़ी की रक्षा के लिए मजबूती से आगे बढ़कर लड़ेंगी और अपना हक लेकर रहेंगी। महिलाओं को इस बात पर गर्व है कि अतीत में उनकी माताओं, बहनों, और दादियों ने अपने संघर्ष के द्वारा असंख्य कठिनाइयों के बावजूद पीढ़ी दर पीढ़ी दिल्ली देहात (दादालाई जमीन) को संजो कर रखा है। ये मामला दिल्ली देहात के फसल व नसल के अस्तित्व से जुड़ा है। इसलिए इसे अंतिम परिणति तक पहुंचाने हेतु महिलाओं ने भी इस मुहिम में अपनी उपस्थिति दर्ज़ करायी है और मातृ-शक्ति को समायोजित करके इस आंदोलन को एक नया धार दिया है।