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आखिर क्यों है जेएनयू सुर्ख़ियों में?

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source: facebook/JNUTeachers

जेएनयू में पढाई के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और राजनितिक मुद्दों पर बहस यहाँ का एक खास हिस्सा है| यहाँ के छात्र देश और दुनिया में हो रहे अत्याचार और जुल्म के खिलाफ हमेशा से मुखर रहे हैं और ऐसे मुद्दों पर उनके द्वारा विरोध प्रदर्शन एक आम बात है| यही बात इस देश के बाकि विश्वविद्यालोयों से इसे अलग करती है किन्तु बीते दो सालों में जेएनयू की साख को दुसरे तरीके से भारतीय मीडिया और राजनितिक पार्टियों ने प्रस्तुत किया है| इसकी साख को वर्तमान कुलपति एम् जगदीश कुमार के रवैया और मनमर्जी बदलाव से काफी धक्का लगा है|

वर्तमान वाईस चांसलर ने यहाँ कार्यरत शिक्षक और छात्र से बिना संपर्क और किसी बातचीत के कई ऐसे फरमान जारी किये हैं, जिससे यहाँ के शिक्षक और छात्र दोनों नाराज हैं| वर्तमान कुलपति के कुछ फरमान:

  • यहाँ पढाई कर रहे शोधार्थियों के लिए हाजिरी की अनिवार्यता
  • जीएसकैश को ख़त्म करना
  • 7 सेंटर के चेयरपर्सन को अचानक से हटा देना
  • हॉस्टल फी और फाइन को कई गुना ज्यादा करना
  • यौन उत्पीडन के आरोपी पर कोई करवाई नहीं करना और चुप्पी साधे रहना
  • SC/ST/OBC आरक्षण नियमो का पालन नहीं करना
  • विरोध प्रदर्शन और लोकतान्त्रिक अधिकार को सीमित करना
  • प्रवेश प्रक्रिया में 100 प्रतिशत साक्षात्कार को तवज्जो देना
  • प्रवेश प्रक्रिया के नियमों में भारी उलटफेर करना

ऐसे कई फरमान, जिसे यहाँ के छात्र और शिक्षक अव्यवहारिक और विश्वद्यालय के समावेशी और उदारवादी सोच के खिलाफ बताते हैं| यहाँ पढाई कर रहे छात्र नाम न बताने के शर्त पर यह कहते हैं-

वर्तमान कुलपति केंद्र और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के इशारे पर काम कर रहे हैं | इनकी हर कोशिश है कि जेएनयू को बर्बाद कर दिया जाए | अगर ऐसा नहीं  है तो फिर जेएनयू  में लगातार छात्र और शिक्षक को बिना भरोसे में लिए इस तरह के तुगलकी फरमान क्यों जारी हो रहा है ? जेएनयू तो अपनी स्थापना से ही अपने अकादमिक एक्सीलेंस के लिए जाना जाता है और रेटिंग  संस्थाओं ने इसे हमेशा ऊपर रखा है | 

वही भारतीय भाषा केंद्र और ओबीसी फोरम से जुड़े छात्र नेता मुलायम कहते हैं-

वर्तमान कुलपति वही कर रहे हैं जो इन्हें केंद्र से इशारा मिल रहा है | ये केंद्र सरकार और आरएसएस के चमचे हैं , जो आरक्षण और महिला अधिकार के खिलाफ है | यही कारण है कि कैंपस में आरक्षण के नियमो को ताक पर रख दिया गया हैं  | साथ ही यौन उत्पीडन के आरोपी  प्रोफेसर खुलेआम घूम रहा हैं |

छात्रों से बात करने पर इनके चेहरे पर प्रशाशन का डर और दहशत साफ़ देखा जा सकता है | यह डर केवल छात्र महसूस नहीं कर रहे हैं बल्कि यहाँ के प्रोफेसर भी डर के साये में हैं | किन्तु, इस डर से निपटने और नित्य दिन आते प्रशाशन के तुगलकी फरमान के खिलाफ छात्र और शिक्षक एकजुट हो रहे हैं और जेएनयू प्रशाशन के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं|

Source: Yahoo.com

हाल में ही सेंटर फॉर लाइफ साइंसेज के एक प्रोफेसर पर  उनके साथ शोध करने वाली 9 महिला शोधार्थियों ने पुलिस में शिकायत की और विश्वविद्यालय प्रशाशन को भी अवगत कराया किन्तु अभी तक प्रशाशन की तरफ से इस बारे में कोई औपचारिक बयान नहीं आया है और छात्र लगातार आरोपी प्रोफेसर को निलंबित करने की मांगे कर रहे हैं |

Source: facebook/JNUTeachers

ऐसे में यह साफ़ है कि एक बेहतरीन विश्वविद्यालय एक साथ कई चुनातियों से गुजर रहा हैं और इसकी साख को बचाने के लिए सरकार अब तक आगे नहीं आई है | अगर ऐसा ही रहा तो आने वाले समय में जेएनयू अपनी विविधता, प्रगतिशीलता और समावेशिक गुणों को खो देगा | ऐसे में जरूरत है कि जेएनयू में वर्तमान में हो रहे ग़ैरवाजिब बदलाव को देश की जनता के सामने लाया जाए क्यूंकि ऐसे बदलाव देश और देश के हरेक तपके के लोगो को प्रभावित करेगा| उदहारण के लिए – यदि आरक्षण के नियमो को अच्छे से लागू नहीं किया गया तो जो कुछ भी गरीब छात्र यहाँ पढ़ने आते हैं और उच्च-शिक्षा के अपने सपने को साकार करते हैं, वो नहीं पूरा हो पायेगा| वैसे ही लडकियाँ जो यहाँ उन्मुक्त और बेख़ौफ़ माहौल में पढ़ती और घुमती हैं, लेकिन अगर 9 मुकदमो के आरोपी को खुला घुमने दिया गया और ऐसे मामलो में सख्ती से नहीं निपटा गया तो यह भी उच्च शिक्षा की सोच रखने वाली लड़कियों को हत्तोसाहित करेगा|