आज भारत में कोरोना की दूसरी लहर चल रही है। एलेक्ट्रोनिक, प्रिंट, और सोशल मीडिया पर देश में जरूरी दवाओं समेत अनेक आवश्यक वस्तुओं की कमी की खबरें छायी हुई हैं। पिछले कई दिनों से भारत के भिन्न-भिन्न राज्यों से ऑक्सीजन की भयानक किल्लत की सूचना आ रही है। इसके कारण आये दिन लोगों को अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ रहा है। इसलिए ऑक्सीजन की कमी के कारण पूरा राष्ट्र अव्यवस्थित नजर आ रहा है। लेकिन देश में केरल एक ऐसा राज्य है जो अपने नागरिकों की ऑक्सीजन की आपूर्ति के बाद अपने पड़ोसी राज्य तमिलनाडु और कर्नाटक को भी ऑक्सीजन की आपूर्ति कर रहा है। अर्थात इस संकट की घड़ी में जब पूरा देश एवं राज्य किसी बाह्य मदद की उम्मीद में बैठे हैं, तो ऐसे स्थिति में केरल ऑक्सीजन की आपूर्ति में आत्म-निर्भर के साथ में इसका अतिरिक्त उत्पादन कर रहा है। केरल जैसे छोटे राज्य का ये अनोखापन इस अस्त व्यस्त दौर में किसी आश्चर्य से कम नहीं है। ऐसी स्थिति में, केरल देश के अन्य राज्यों को नई दिशा दिखाने के साथ-साथ देश व राज्य के नीति निर्माताओं और व्यवस्थापकों के सामने कई प्रश्न खड़ा करता है। ऑक्सीजन आपूर्ति में केरल का आत्म-निर्भर बनना कैसे संभव हुआ? केरल अतिरिक्त ऑक्सिजन का उत्पादन कैसे कर रहा है? इन प्रश्नों के उत्तर में राज्य का आपदा प्रबंधन का अनुभव, राज्य सरकार और केरल की स्थानीय ग्राम पंचायतें इस आत्म-निर्भरता में आधार-स्तम्भ की तरह खड़े नजर आते हैं।
राज्य सरकार की भूमिका

इसमें दो राय नहीं है कि केरल के पास आपदा प्रबंधन का लंबा अनुभव है। कोविड रूपी वैश्विक महामारी के प्रबंधन में भी केरल ने अपने आपदा प्रबंधन अनुभव का उपयोग किया है। लॉक डाउन के खत्म होने के तुरंत बाद देश के लगभग सभी राज्य सुस्त पड़ गये। लेकिन पिछले अनुभव के आधार पर केरल ने देश के अन्य राज्यों से इत्तर अपने पूर्व मुख्य सचिव के नेतृत्व में 17 सदस्यीय केरल कोविड कार्य दल (केरल कोविड टास्क फोर्स) का गठन कर लिया। ये टास्क फोर्स कोविड की स्थिति का अवलोकन एवं मूल्यांकन कर हर स्थिति से राज्य सरकार को अवगत कराने का काम करता है। राज्य सरकार भी कोविड कार्य दल के सुझाव और सूचना को गंभीरता से लिया और निकट भविष्य की आवश्यकता को देखते हुये अपने आधार-भूत संरचना को मजबूत किया। बीबीसी हिन्दी की रिपोर्ट के अनुसार आज राज्य के पास आइनेक्स, एएयू संयंत्र, केएमएमएल, कोचीन शिपयार्ड, बीपीसीएल जैसे 11 वायु पृथक्करण इकाई हैं, जो ऑक्सीजन निर्माण का काम कर रहे हैं । आज केरल को कॉविड के लिए 35 मिट्रिक टन और नॉन कोविड के लिए 45 मिट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत है। अभी हाल में केरल की ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता 199 मिट्रिक टन है। अपनी जरूरत को पूरा करने के बाद केरल 70 मिट्रिक टन ऑक्सीजन तमिलनाडु और 16 मिट्रिक टन ऑक्सीजन कर्नाटक को निर्यात कर रहा है। देश के अन्य राज्यों की तरह केरल में भी कोविड मरीजों के लिए ऑक्सीजन की मांग 73 से 84 मिट्रिक टन हो गई। लेकिन प्रदेश सरकार इस बड़ी हुई क्षमता को लेकर परेशान नहीं है। क्योंकि उसके ऑक्सीजन संयंत्र अपनी सौ फीसदी क्षमता के साथ काम नहीं कर रहे हैं। अगर जरूरत पड़ी तो इन ऑक्सीजन इकाइयों की क्षमता बढ़ाई जा सकती हैं। ये सब इसलिए सम्भव हो पाया क्योंकि केरल ने अपने बजट का बड़ा हिस्सा सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा में निवेश किया है। परिणाम स्वरूप आज राज्य के पास आपदा नियंत्रण हेतु प्रचुर प्रशिक्षित मानव संसाधन है।
पंचायत की भूमिका

73 वां संविधान संशोधन ने देश की पंचायतों को अधिकार तो दिया है पर केरल को छोड़कर देश के अन्य राज्यों की पंचायतें इतनी सशक्त नहीं हैं कि अपने अधिकारों का समुचित उपयोग कर सकें। 11वीं अनुसूची पंचायतों को 29 विषयों पर कार्य करने की अनुमति प्रदान करती है। इन विषयों के संदर्भ में भी केरल अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा समावेशी प्रतीत होता है। आज देश की अधिकांश पंचायतें अपनी ग्राम स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति से अनभिज्ञ हैं, लेकिन आशा और प्रदेश में चुन कर आने वाले स्थानीय पंचायत सदस्य केरल की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ हैं। इससे आगे केरल ने कोविड मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के स्थानीय प्रशासनिक ढांचे को पहले से ज्यादा विकेंद्रित किया है। राज्य के ग्राम पंचायतों की निष्क्रिय हो चुकी वार्ड समिति को वर्तमान में पुनर्जीवित करके उसके अधिकार और भूमिका को भी निर्धारित किया है। वार्ड समिति के सदस्य वार्ड के किसी भी नागरिक को बुखार होता है तो उसे चिन्हित कर लेते हैं। चाहे बुखार किसी भी कारण से हो, मरीज का कोविड जांच किया जाता है। फिर उसी के अनुरूप उसका इलाज भी किया जाता है। जन-समस्या और जन-समस्या की गंभीरता के हिसाब से परत दर परत सत्ता का विकेन्द्रीकरण क्यों जरूरी है और विकेन्द्रीकरण कैसे किया जाता है? ये देश के अन्य राज्यों को केरल से सीखने की जरूरत है। आज केरल में भी कोविड के मरीजों की संख्या पहले से ज्यादा है। लेकिन अन्य राज्यों की तुलना में यहाँ मरीजों को ऑक्सीजन की आवश्यकता कम है। ऐसा इसलिए संभव हुआ कि राज्य शुरू में ही आशा और वार्ड समिति के माध्यम से कोविड के मामलों की पहचान करने एवं जल्दी इलाज शुरू कर पाने में सक्षम है। प्राथमिक स्तर पर महामारी का इलाज हो जाता है। इसलिए हर मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ रही है। अगर हम वास्तव में जन-समस्या से सरोकार रखते हैं तो केरल की तर्ज़ पर देश के अन्य राज्यों को अपनी पंचायतों को सशक्त व समावेशी बनाने तथा अपने बजट का अहम हिस्सा शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी जरूरी सेवाओं के लिए सुरक्षित रखना पड़ेगा। यहीं एक समाजवादी, लोकतान्त्रिक व लोक-कल्याणकारी राज्य का नैतिक और संवैधानिक कर्तव्य भी है।










