मौजूदा लोकसभा चुनाव में बिहार के बेगूसराय सीट पर जो चुनावी जंग चल रहा है वो बहुत रोचक और महत्वपूर्ण है। इस बार इस लोकसभा सीट पर साम्प्रदायिक हिंदुत्व की राजनीति करने वाले एक कुख्यात, कट्टर चेहरा गिरिराज सिंह भाजपा की तरफ से चुनाव लड़ रहा है। ये वही गिरिराज है जो आए दिन मुसलमानों को पाकिस्तान जाने की धमकी देता रहता है। भाजपा द्वारा इस बार इनको नवादा से न लड़ा कर बल्कि बेगुसराय से लड़ाया जा रहा है। इस सीट पर दो उम्मीदवार और लड़ रहे हैं जिसकी वजह से मीडिया के सभी कैमरों की निगाह इस सीट पर लगी हुई है। पहला बिहार महागठबंधन की तरफ से राजद के प्रबल उम्मीदवार डॉ. तनवीर हसन हैं तो दूसरा भाकपा की तरफ से कन्हैया कुमार हैं।

गिरिराज सिंह पूरे देश में मुस्लिमों के खिलाफ समाज में नफरत फैलाने के लिए जाने जाते हैं। उन्हें कट्टर हिदुत्व के बड़े प्रतीक के रूप में देखा जाता है। सांप्रदायिक नफरत को प्रचारित करने तथा साझी संस्कृति के ताने-बाने को तोड़ने के लिए आये दिन वो बयानबाजी करते रहते हैं। आज बिहार की सियासत में बेगूसराय की सीट पर जैसी परिस्थिति बनी है उसका विश्लेषण किया जाय तो हम देखते हैं कि गिरिराज के खिलाफ लड़ने वालों में एक तरफ युवा चेहरा कन्हैया कुमार हैं तो दूसरी तरफ एक जमीनी, सेकुलर, वरिष्ठ समाजवादी नेता तनवीर हसन हैं। राजनीतिक तजुर्बे में तनवीर हसन और गिरिराज को हमउम्र कहा जा सकता है। दोनों पुराने नेता हैं और काफी समय से राजनीति कर रहे हैं।
मीडिया में हवा बनाया जा रहा है कि मुकाबला गिरिराज और कन्हैया कुमार के बीच है, जो कि सरासर मिथ्या और झूठा प्रोपगैंडा है। तनवीर हसन कई सालों से बेगुसराय क्षेत्र में सियासत कर रहे हैं और हमेशा सक्रिय हैं। जनता के बीच उनकी पहचान है। राजद का वहाँ भाकपा से अधिक जनाधार है। पिछली बार के चुनाव के आकड़े उठा कर विश्लेषण करें तो तनवीर हसन भाजपा के उम्मीदवार मरहूम भोला सिंह से 58335 वोटों के अंतर से दूसरे स्थान पर थे। गिरिराज सिंह को इस बार नवादा से बेगुसराय लड़ने के लिए भेजा गया है। बेगूसराय क्षेत्र की जातीय संरचना को देखें तो गिरिराज सिंह और कन्हैया कुमार की जाति भूमिहार का वहाँ साढ़े चार लाख के करीब वोट माना जाता हैं लेकिन मुसलमान तथा अन्य जातियों का वोट भूमिहारों से कहीं ज्यादा है। एक जाति के वोट से वहाँ कोई नहीं जीत सकता है। मुसलमानों का वोट गिरिराज को मिलेगा नहीं। यादव, कोइरी, माझी तथा मल्लाह जाति का वोट भी उन्हें नही मिलने वाला है।
जदयू-भाजपा गठबंधन की वजह से कुर्मी वोट को छोड़ भी दिया जाय तो भी इन जातियों के साथ-साथ बाकी अन्य जातियों का अधिकतर वोट राजद महागठबंधन के साथ है। मीडिया में बैठे सवर्ण जिस तरह से टीवी पर माहौल बना रहे हैं अगर भूमिहार वोटर गिरिराज और कन्हैया कुमार दोनों को अपना आशीर्वाद दे देगा तब तो तनवीर हसन की जीत पक्की है। भारत देश में जाति एक सच्चाई है। भारतीय वामपंथी और दक्षिणपंथी चाहे जितना इसे खारिज करते रहें लेकिन जातियों को लुभाने और रिझाने के लिए हमेशा ये प्रयास करते रहते हैं। बिहार के सामंती समाज में दलित-पिछड़ों ने सवर्णों के जातीय आंतक को बहुत नजदीकी के देखा और भोगा है इसलिए वो भूमिहार उम्मीदवारों पर भरोसा करने की अपेक्षा अपना वोट गठबंधन को देना मुनासिब समझेगा। हाँ कुछ मुस्लिम नौजवानों को जरूर सवर्णवादी वामपंथी बहकाएंगे लेकिन जातीय गोलबंदी की गुणा-गणित में उसका भी अधिक असर नहीं पड़ेगा।
गिरिराज सिंह की सारी सियासत मुस्लिम विरोध या घृणा पर टिकी हुए है। अगर ऐसे में तनवीर हसन जीतते हैं तो यह हिदुत्व उन्माद की सियासत करने वाले गिरिराज को बहुत करारा जवाब मिलेगा। तनवीर हसन की जीत भाजपा-संघ के उन्मादियों को सबक सिखाते हुए देश को बहुत बड़ा संदेश देगी कि देखो बात-बात पर मुसलमानों को पाकिस्तान भेजने वाले गिरिराज को लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और अमनपसंद जनता ने कितना अच्छा जवाब दिया है। प्रगतिशील, समाजवादी, सेकुलर मुस्लिम उम्मीदवार से गिरिराज का हार जाना बिहार में भाजपा और संघ की नैतिक हार होगी। समाज में जहर घोलने वाली सांप्रदायिक नफ़रत वाली विचारधारा की हार होगी। इस हिसाब से तनवीर की जीत ऐतिहासिक जीत साबित होगी। इसलिए प्रगतिशील दलित-पिछड़े और अकलियत के लोगों को पूरी सिद्दत से लग कर तनवीर हसन का प्रचार करना चाहिए और गिरिराज सिंह जैसे भाजपा-संघ के नमूनों को सबक सिखाने के लिए जिताना चाहिए। गिरिराज की हार, देश में उभरते कट्टर सांप्रदायिक फासीवाद की हार होगी। तनवीर हसन की जीतने से देश के सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक तथा समाजवादी चरित्र की जीत होगी। आज बिहार की जनता के पास गिरिराज सिंह जैसे लोगों को सबक सिखाने का यह ऐतिहासिक मौका है। देश में मुस्लिम विरोध की राजनीति करने वाले नेता को एक मुस्लिम नेता पटकनी दे तब तो जीत में कुछ मजा है। मेरे नजर में बिहार के बेगुसराय क्षेत्र का चुनाव इस नजरिए से रोचक और महत्वपूर्ण है।










