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वक्त का रुख क्या है?

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Image credit: Rana Ayyub

मैं इस समय राष्ट्रीय जल सम्मेलन में शामिल होने हेतु मध्य प्रदेश में हूँ। इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में भिन्न-भिन्न मुद्दों को लेकर सक्रिय सामाजिक कार्य-कर्त्ताओं, शिक्षाविद और कला-साहित्य से संबंध रखने वाले लोगों से मुलाक़ात हुई। प्रथम दृष्टि में वर्तमान समय की हालातों को लेकर उनके मन में एक पीड़ा दृष्टि-गोचर हुई। इस सम्मेलन में मुझे एक गांधीवादी-समाजवादी कार्य-कर्त्ता के साथ सहवास का अवसर मिला। जिनकी परवरिश और समाजीकरण गांधी की नई तालीम के माध्यम से हुई थी और बिनोवा, जेपी और लोहिया के साथ काम करने का एक लंबा अनुभव था। इसके अलावा लंबे समय तक वह दिल्ली के गांधी शांति संस्थान से भी जुड़े रहे। आज वे अपनी जिंदगी की आखिरी पड़ाव की ओर हैं। लेकिन वो हमारे जैसे लाखों करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा के स्रोत हो सकते है। इसलिए यह सम्मेलन मेरे लिए एक शुभ अवसर से कम नहीं था।

Image credit: Amandeep Kaur

शाम के समय बड़ी उत्सुकता से उन्होंने पूछा कि दिल्ली विश्व-विद्यालय की आंदोलन की क्या स्थिति है। मैंने निराश हतास मन से उन्हें स्थिति से अवगत कराया और बताया कि आंदोलन अभी जारी है। तो उन्होंने मुस्कराते हुये जबाब दिया कि चलो ये बात तो साफ हो गई कि इस देश का छात्र-नौजवान अभी जिंदा है। जो इस बात का संकेत है कि देश में कुछ अच्छा करने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने ने गुजरात नव-निर्माण आंदोलन के हवाले से इस बात की पुष्टि की कि सत्ता हमेशा दंडात्मक एवं तानाशाही रवैया अपनाती है। जब अहमदाबाद के इंजीन्यरिंग कॉलेज के छात्र अपनी बढ़ी हुई फीस को लेकर आंदोलन किये तो चिमन सरकार ने उसे कुचलने की हर संभव कोशिश की। लेकिन छात्र कई महीने तक सड़कों पर डटे रहे। अंततः जेपी ने आंदोलन को संभाला और चिमन भाई पटेल को मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ा। कुछ ऐसी ही हलचल बिहार के छात्र समाज में देखने को मिली। तो समय की नजाकत और हवा की रुख को भापते हुये “गुजरात की राह हमारी है, अब बिहार की बारी है” तथा “खुला दाखिला सस्ती शिक्षा, लोक-तंत्र की यही परीक्षा” जैसे नारे के साथ के छात्र समुदाय की ऊर्जा को शिक्षा और शिक्षण संस्थान से जुड़े मुद्दों की ओर मोड़ा। जिसमें उनको सफलता हासिल हुई। इसी छात्र-नौजवान की शक्ति को आधार बनाकर तत्कालीन सामाजिक मुद्दों के समाधान हेतु “जय प्रकाश का बिगुल बजा तो जाग उठी तरुणाई है, तिलग लगाने तुम्हें जवानों क्रांति द्वार पर आई है” का नारा दिया गया। जिसने देश में सम्पूर्ण क्रांति जैसे महायज्ञ का रास्ता प्रशस्त किया। निश्चित तौर पर  यहाँ जेपी की नेतृत्व क्षमता और कार्यकुशलता को सराहने की जरूरत है। क्योंकि पहली बार ऐसा लगा था कि सामाजिक मुद्दों के संदर्भ में देश के जन-मानस में कोई सांझा दर्द बहता है, हाथ नहीं मिलते पर कोई अंगुली पकड़े रहता है। ये उनकी अद्वितीय प्रतिभा थी जिसने देश में एक जन-ज्वार उत्पन्न किया। जिससे देश में एक बहुत बड़ा बदलाव संभव हुआ। इस यज्ञ में छात्र, नौजवान, किसान, महिला, और गरीब ने  अपना सर्वत्र न्यौछावर किया।  इसके द्वारा एक संदेश  गया कि एक लोकतांत्रिक देश में जनता सर्वोपरि है। लोगों का ये त्याग, उल्लास, उत्साह, और ऊर्जा ने इस देश में लोकतन्त्र की जड़े गहरी और मजबूत की। जिसके माध्यम से लोकतन्त्र ज्यादा स्वस्थकर हुआ।

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विगत महीने दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्व-विद्यालय के छात्र अपनी बढ़ी हुई फीस को लेकर सड़कों पर आए। जिसे देश अन्य शिक्षण संस्थानों ने अपना नैतिक समर्थन  दिया। लेकिन मीडिया जगत के लोगों ने इन छात्रों को देश-द्रोही, आतंकवादी, अरबन-नक्सल, टैक्स पर पलने वाले लोग, जैसे शब्दों से नवाजा। जिससे एक अपराध का बोध होता है। क्या एक सरकारी विश्व-विद्यालय में पढ़ना गुनाह है या ये संस्थान अपराध का अड्डा हैं? विश्व-गुरु बनाने का सपना पालने वाली ये सरकार ने मुक-दर्शक बनकर देश की सर्वोतम एवं दुनिया की सर्वोतम 500 विश्व-विद्यालय में शामिल शिक्षण संस्थान की छवि धूमिल होते हुए अपनी आँखों से देखा। इस अवसर पर सरकार इस शिक्षण संस्थान की गरिमा से परे खामोश रहना श्रेष्ठकर समझा। सरकार की ये खामोशी इस बात प्रतीक है कि संविधान उसके लिए सिर्फ रद्दी का टुकड़ा है और शिक्षा सरकार की प्राथमिकता में नहीं है। अन्यथा इस संस्थान की छवि को धूमिल करने वाले लोगों के विरूद्ध कुछ कानूनी कदम उठाए जाते। आज देश के विभिन्न हिस्सों के विश्व-विद्यालयों के छात्र अपने अपने मुद्दों को लेकर तथा एक दूसरे के समर्थन में सड़कों पर हैं। ये इस बात का संकेत है कि शिक्षा-जगत में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं हैं। छात्र पठन-पाठन के माहौल को अपने अनुकूल बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जो  एक अंधेरी कोठरी की बदलाव की छट-पटाहट सा प्रतीत होता है।  लेकिन इसे एक करने के लिए कोई संपर्क सूत्र नहीं दिख रहा है। इसलिए देश को इस अंधकार से निजात हेतु एक प्रकाश की जरूरत है।