Home Blog समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष माननीय अखिलेश यादव जी के नाम खुला-पत्र

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष माननीय अखिलेश यादव जी के नाम खुला-पत्र

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Image Credit: The Hindu

प्रिय अध्यक्ष जी,

पहली बार एक छोटा सा खत आपको लिखने का मन किया|मै पार्टी का आधिकारिक सदस्य नहीं हूँ इसलिए खुला पत्र लिखने की धृष्टता कर रहा हूँ| मूल बात यह है कि हमारे दादा या पिता जी जब किसी श्रमजीवी किसान से उसकी गाय या भैंस खरीदते थे तोउसके बारे में पूरी तहकीकात करते| दो चार बार नज़र दौड़ा कर उसके लूर-लक्षण देखते। खोजबीन करते कि इसमें कहीं कोई ऐब, दुर्गुणया बीमारी तो नहीं है ? कहीं इंसानों को मारती-दौड़ाती या नफ़रत तो नहीं करती?

इतना ही नहीं बल्कि अगर मन नहीं भरता तो उस गांव के लोगों से फलाने की भैंस-गाय के बारे में पूछते और सारी जानकारी जुटाते| जब पूरी तरह से तसल्ली हो जाती तब जाकर उसे अपने घर-दुवार पे ले आते| यूं ही किसी मवेशी के गले में अपना पगहा डाल कर घर में नहीं घुसा लाते थे| क्योंकि पूरे घर की उम्मीदें उनके चयन पर भरोसा करती थीं|

यह खबर जान कर हैरान हूँ कि एक मुस्लिम विरोधी,घनघोर जातिवादी तथा महिलाओं के प्रति धृणित सोच रखने वाली “हिंदू युवा वाहिनी भारत” टोली तथा उसके सरगना का समाजवादी पार्टी में ससम्मान प्रवेश दिया गया| यह कदम सच्चे समाजवादियों को अचंभित करने वाला है| यह निर्णय पार्टी तथा विचारधारा दोनों के लिए घातक है|

सपा अध्यक्ष जी हम जानते हैं कि आपको कुछ कहने की मेरी कोई आधिकारिक हैसियत नहीं है मगर मैं भी आपके शुभचिंतकों मे से एक हूँ| मेरे जैसे सैकड़ों और भी होंगे| लेकिन निराशाजनक यह है कि जो गणमान्य मेधावी महापंडित आपके सिपहसालार बने हैं वो आपसे भीतरघात कर रहे हैं| ये आपका बनकर काम चुपचाप आतंकी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का कर रहे हैं| यह नफ़रती टोली जो अभी समाजवाद के कुंड में नहा कर निर्मल हो रही है यह अजय सिंह बिष्ट की मक्कार चाल भी हो सकती है| जिसे आगामी 2022 के चुनाव के पहले मुखबिरी के लिए तैयार किया गया हो। इस टोली के गुर्गों के सोच-विचार व समझ देख कर तो यही प्रतीत हो रहा है। इसकी क्या गारंटी है कि ये निरा स्वार्थ में डूबी ये टोली समाजवादी पार्टी के साथ विश्वासघात नहीं करेगी? निषाद पार्टी तथा कुछ महत्वाकांक्षी राज्यसभा सांसदों के नीयतखोरी को हम सब देख-भोग चुके हैं|

अध्यक्ष महोदय, शुरूआत से पार्टी को प्रदेश में खड़ी करने में हजारों मेहनतकशों ने कुर्बानी दी है| किसी ने आपसे कभी उसकी दुहाई भी नहीं दी होगी|वो सच्चे समाजवादी चुपचाप पार्टी से मुहब्बत करते और समाजवादी विचारधारा को मुल्क में कायम होने की मन में हसरत रखते रहे हैं|पार्टी के खातिर जहां जरूरत पड़ी अपने जान की बाजी लगा दी| लेकिन कभी जवानी कुर्बान का नारा नहीं लगाया|वो लड़ाके कभी झूठे स्वांग नहीं रचे|

लेकिन जिस ज़हरीले जेहन वाली टोली को पार्टी के अंदर दाखिला मिला है वो समाजवादी मूल्यों पर जरा भी खरा नहीं उतरते प्रतीत होते| आप उन्हें पार्टी में लाते लेकिन उसके पहले उनके अतीत के काले कारनामों के मद्देनजर उन्हें परखते| उनकी क्रिया-कलापों पर नज़र रखते| देखते कि उनमें अपने कुकर्मों व मुस्लिम विरोधी नफ़रत को लेकर अफसोस या आत्मग्लानि है कि नहीं? खुले मंच से ये टोली अपने नफरती ख़्वाबगाहों को स्वीकार करके उसकी निंदा करती है कि नहीं? अगर ऐसा नहीं है तो फिर किस बात की हड़बड़ी थी गदा पकड़ कर हवा में लहराने की|आखिर मंच पर लहराती हुई ये गदा भविष्य में किसकी छाती तोड़ेगी? सच्चे समाजवादियों को अपने विरोधियों की हर जालसाज़ी मंसूबों को लेकर सतर्क रहना चाहिए|

इसलिए माननीय अध्यक्ष जी आपसे विनती है कि आप अपने इस निर्णय पर फिर से विचार करिए|ऐसे घुसपैठियों व मज़हबी नफ़रती लोगों से बचा लीजिए पार्टी को| मेरी आशंका है कि ऐसे लोग कभी भी मन से पार्टी व समाजवादी उसूलों को स्वीकार नहीं पाएंगे| हालांकि इसी के साथ खुशी भी इस बात की है कि आपने बहुजन समाज पार्टी के वैचारिक रूप से समर्पित जिन नेताओं तथा विभिन्न श्रमजीवी जातियों के नौजवानों को समाजवादी पार्टी से जोड़ा है, उनका मान-सम्मान बढ़ाया है वो बहुत ही काबिल ए तारीफ़ है|

ऐसे मिशनरियों के पार्टी में शामिल होने से समाजवादी विचारों की धमनियों को बल मिलेगा| आपका यह निर्णय हम सब को आह्लादित करने वाला है|लेकिन संघी सपोलों को दूध पिलाना किसी भी शास्त्र में उचित नहीं माना गया है| अत: इस रणनीतिक भूल पर विचार करिए नहीं तो आज न कल ये आपको जरूर डसेंगे|फिर आप तो अहिमर्दन(विषधरों को कुचलने वाले श्री कृष्ण) कुल-खानदान का माना जाता हैं| फिर संघी सपोलों के गरलग्रंथि की पहचान करने में चूक नहीं होनी चाहिए| इनका नफरती ज़हर समाज में तेजी से फैल रहा है| 2022 के पहले तक हमें इनका जहर उतारने के लिए सारी वैचारिक जड़ी बूटी तैयार कर लेनी चाहिए|

धन्यवाद

आपका एक शुभचिंतक
डॉ. मुलायम सिंह यादव
(जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय)