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कौन थे चौधरी चरण सिंह ?

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Source: Wikipedia

चौधरी चरण सिंह दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, केंद्र में गृह और वित् मंत्री और कुछ समय के लिए प्रधानमंत्री रह चुके हैं| आज जब भारत के किसान मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं, वैसे में चौधरी चरण सिंह और उनकी विचारधारा और भी प्रासंगिक हो जाती  है|

भारत गाँवों में बस्ता है

चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसंबर 1902 को उत्तर प्रदेश के हापुर जिले के नूरपुर गाँव में हुआ था| वो शुरुआत से ही गांधी जी के विचारों से प्रभावित रहे और आगे चलकर वो राजनीति में सक्रिय हुए| उनका मानना था कि भारत गाँव में बस्ता है और इस देश के विकास के लिए किसानो का विकास जरूरी है| यही कारण है कि उनके जन्म दिवस को भारत में किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है| चौधरी चरण सिंह किसानों के विकास के साथ-साथ ये भी मानते थे कि देश के विकास के लिए देश की राजनीति में ग्रामीण लोगो की भागीदारी और नेतृत्व बहुत ही जरूरी है|

किसानों की प्रथिमकता

चौधरी चरण सिंह एक बेबाक, इमानदार और सत्यनिष्ठ इंसान थे| वो कांग्रेस में रहते हुए भी, उन्होंने बेबाकी से कांग्रेस के नेताओं और नीतियों का विरोध किया| वो जवाहरलाल नेहरु के शहरीकरण और औद्योगीकरण को प्राथिमिकता दिए जाने का विरोध करते थे और कहते थे कि भारत को किसानों की समस्याओं पर ज्यादा बल देने की जरूरत है क्योंकि 80 प्रतिशत लोग गांवों में रहते हैं और कृषि से गुजर-बसर करते  हैं| उन्होंने अपने मुख्यमंत्री काल में जमींदारी प्रथा को ख़त्म करने के लिए भूमि-सुधार बिल (1952) लाया, जिससे दलित और पिछड़े जातियों को जमीन की मलकियत मिली|

छात्र राजनीति को बंद करना

चौधरी चरण सिंह आपातकाल (1975-1977) के दौरान जेल भी गए| जेल से आने के बाद चौधरी चरण सिंह और भी सक्रिय हुए और उन्होंने किसानों के मुद्दे को केंद्र स्तर पर उठाना शुरू किया| हालांकि उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल में छात्र राजनीति को बंद करने जैसे मुद्दों पर उनकी आलोचना भी होती है| जो भी हो, चौधरी चरण सिंह आजाद भारत में किसानों के अग्रणी नेता थे और उनकी विचारधारा आज और भी वाजिब लगता है जब भारतीय किसान आत्महत्या और ग़रीबी जैसे गंभीर मुद्दों से जूझ रहे हैं|

बेबाक नेता और बेहतरीन लेखक

उनकी 29 मई 1987 में मृत्यु, एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं थी बल्कि एक एक विचारधारा और किसानों के साथ खड़ा होने वाला मजबूत आवाज का चले जाना था| उन्होंने अपने जीवन-काल में अर्थशास्त्र और किसान से जुड़े मुद्दे पर काफी किताबे लिखी| मशहुर लेखक और राजनीति शास्त्र के अध्यापक पॉल ब्रास का मानना है कि चौधरी चरण सिंह ने जिस तरह से किसान, गरीब और मध्यम वर्गीय लोगो के लिए काम किया और उनके बारे में किताबे लिखी, उनको उतनी तवज्जो नहीं मिली है| कुछ भी हो, चौधरी चरण सिंह एक बेबाक नेता, बेहतरीन लेखक, और एक ईमानदार आदमी थे| आज जरुरत है उनके विचारों को फिर से राजनीति में मुख्य मुद्दा बनाने की ताकि देश के 60 प्रतिशत किसान जो आज भी ग़रीबी में आत्महत्या करने को मजबूर हैं, देश के नीतियों में प्राथिमिकता पा सके |