भारत में एक राष्ट्रीय आपदा तेजी से बढ़ रही है, उस आपदा का नाम है बेरोजगारी| लगातार साल-दर-साल बेरोजगारी युवाओं पर कहर ढाहने को खड़ी है| जिस सरकार को युवाओं ने अपने रोजगार के लिये चुना वो सरकार चुप्पी साध कर बैठी है।
बेरोजगारी का पहला और सबसे मुख्य कारण जनसंख्या में निरंतर वृद्धि होना है। विभिन्न अध्ययनों से यह पता चला है कि वर्ष 2025 तक भारत चीन को भी पछाड़ देगा और विश्व का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जायेगा। हालांकि, सरकार ने जनसंख्या नीति, परिवार नियोजन और कल्याण के कार्यक्रम शुरू किये है और प्रजनन दर में भी लगातार कमी आई है। किन्तु, यह काफी नहीं है| जनसंख्या में वृद्धि होने का कारण गरीबी और निरक्षरता भी है| गरीब परिवारों में एक धारणा है कि परिवार में जितने ज्यादा सदस्य होंगे उतने ज्यादा लोग कमाने वाले होंगे। कुछ लोग बेटा पैदा होने की होड़ में लगातार बच्चें पैदा करते है। सरकार को ठोस कदम उठाना चाहिये ताकि जनसंख्या वृद्धि में रोकथाम लगाई जा सके।
इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाईजेशन (ILO) के अनुसार 2011-2012 में बेरोजगारी की दर 3.8 प्रतिशत थी। फिर 2013-2014 में 4.9 प्रतिशत हुई। इस साल यह बढ़कर 5 प्रतिशत हो गई है| बेरोजगारी की वजह से लोगों पर गंभीर सामाजिक-आर्थिक प्रभाव पड़ता है बल्कि इससे न केवल एक व्यक्ति बल्कि पूरा समाज प्रभावित होता है। यह कहा जा सकता है कि बेरोजगारी में वृद्धि होने से देश में गरीबी की भी वृद्धि हुई है। देश के आर्थिक विकास को बाधित करने में बेरोजगारी मुख्यतः जिम्मेदार है और इसके कारण अपराध दर में भी वृद्धि हुई है। एक उपयुक्त नौकरी की तलाश में असमर्थ बेरोजगार आमतौर पर अपराध का रास्ता चुन लेता है क्योंकि यह पैसा कमाने का आसान तरीका है। लूट, चोरी, छीना-झपटी और अन्य भयंकर अपराधों के तेजी से बढ़ते हुये मामले भी बेरोजगारी का मुख्य कारण है।
वर्ष 2014 में भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक चुनावी वायदा किया था कि प्रतिवर्ष एक करोड़ रोजगार मिलेगा या युवावों को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा और ऋण दिया जायेगा ताकि युवा खुद का व्ययसाय कर सके। हालांकि, सरकार मुस्तैदी के साथ ऐसा नहीं कर सकी| पढ़े-लिखे युवाओं का मजाक उड़ाया गया की पकौड़े तलना भी एक रोजगार है। वर्तमान सरकार अभी तक यह बताने में असफल रही है कि कैसे वो बेरोजगारी जैसे गंभीर समस्या से निपटेंगी|
अब स्थिति साफ़ हो रही है कि जिस तरह से नरेन्द्र मोदी की सरकार ने युवाओं को सुनहरे सपने दिखाये थे, वो एक महज ख्वाबी पुलाव था| यही कारण कि अब युवा अलग-अलग माध्यमों से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचा रही है| मध्य-प्रदेश में एक एनजीओ जिसका नाम (बेरोजगार सेना) है। जो पढ़े-लिखे युवाओं के हक़ की लड़ाई खुद लड़ रही है और सरकार को युवाओं को रोजगार देने के लिये आवाज उठा रही है।साथ ही देश स्तर पढ़े -लिखे युवाओं द्वारा रोजगार गारंटी कानून बनाये जाने की भी मांग भी आने वाले समय में जोड़ पकड़ेगी।
मेरे ख्याल से अब युवाओं को वही सरकार चुननी चाहिये जो रोजगार गारंटी दे कि अगर युवा पढ़-लिख कर अपनी डिग्री हासिल कर लेता है तो उसे दर-दर भटकने की जरूरत नहीं पड़े, उसे तुरन्त रोजगार मिले ताकि वो अपने परिवार का पालन-पोषण कर सके। दूसरी ओर, लोगो द्वारा चुनी हुई सरकार और समाज की जिम्मेदारी बनती है कि वो लोगों को परिवार नियोजन के बारे में जागरूक करे|
लेखक: आशुतोष कुमार सिंह, राजेश पाण्डेय लॉ कॉलेज से लॉ की पढ़ाई कर रहे हैं| उनका संपर्क ईमेल है – yoyoashutoshsingh1995@gmail.com. 









