पोस्ट-ट्रुथ एक ऐसी स्थिति है जहाँ लोग तथ्यात्मक जानकारियों पर कम ध्यान देते हैं और अपने भावनाओं और विश्वास से ज्यादा प्रभावित होते हैं| एक तरह से आपका किसी विचार या जानकारी के बारे में पूर्वाग्रस्त होना तथ्य के साथ प्रस्तुत की गई जानकारियों को नहीं मानने देता है| आप अपने भावनाओं में इस तरह लिप्त होते हैं कि इससे अलग जानने की कोशिश ही नहीं करते हैं|
पोस्ट-ट्रुथ को फ़ैलाने में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और ऑनलाइन मीडिया का बहुत बड़ा हाथ होता है| क्यूंकि हम मीडिया के विश्वसनीयता को शायद ही सवाल करते है और दूसरी और मीडिया जिस तरह से जानकारियों को प्रस्तुत करता है, उसपर तत्काल शक करना काफी मुश्किल होता है| जब डिमोनेटाईजेसन के बाद सरकार ने 500 और 2000 के नोट जारी किए तो एक मशहुर टेलीविज़न पत्रकार ने जोड़ देकर कहा कि 2000 के नोट में इलेक्ट्रॉनिक चिप लगे हैं और अगर यह नोट जमीन के अन्दर भी छुपाया जाता है तो इस से आने वाली सिग्नल से इसका पता चल जाएगा| उस पत्रकार ने अभी तक मेरी जानकारी के अनुसार अपनी इस झूठी सूचना पड़ोसने के लिए कभी भी माफ़ी नहीं मांगी| ठीक उसी प्रकार, दुनिया के सबसे ताकतवर देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बहुत बार ऐसे ही झूठ को प्रचारित किया| न्यूयॉर्क टाइम्स अख़बार के मुताबिक ट्रंप ने जो जानकारियाँ तथ्य पर आधारित कह कर प्रस्तुत किया उसमे लगभग 70 प्रतिशत जानकारियां तथ्य से अलग थी या उसके साथ छेड़-छाड़ किया गया था|
21व़ी सदी में जिस तेजी से इंटरनेट का फैलाव हुआ है और सूचना को प्रसारित करने के माध्यम विकसित हुए है, उसमे पोस्ट-ट्रुथ और मजबूत हुआ है| इसका प्रभाव भारत से लेकर अमेरिका तक में देखने को मिल रहा है| एक तरह से फेक न्यूज़ की दुकाने सज गई है और दुकानदार अपने-अपने तरीक़े से अपने क्लाइंट को फायदा पहुचाने के लिए तथ्यविहीन ख़बरों और जानकारियों को पब्लिक डोमेन में ला रहा है| इसकी सत्यता आते-आते काफी देर हो जाती है और तब तक काफी नुकसान हो चूका होता है|
पोस्ट-ट्रुथ के नुकसान केवल राजनितिक नहीं है बल्कि इसका प्रभाव सामाजिक, आर्थिक एवं वैज्ञानिक गतिविधियों पर भी पड़ता है| उदहारण के लिए – वायुयान का खोज अमेरिका के राईट ब्रदर्स ने किया था लेकिन खबर यह फैलाई गई कि इसका खोज भारत में वेदिक काल में हुआ था| ठीक उसी प्रकार- तीन तलाक असंवैधानिक है और सुप्रीम कोर्ट ने इसे ख़त्म करने का आदेश दिया लेकिन खबर यह फैलाई गई कि सुप्रीम कोर्ट इस्लाम विरोधी है|
इस तरह की सूचनाएं तब और गंभीर हो जाती हैं जब प्रमुख मीडिया, मशहुर टेलीविज़न पत्रकार और नेता इसमें शामिल हो जाते हैं| यह बहुत ही मुश्किल समय है और ऐसी ख़बरें पब्लिक डोमेन पर हावी होने को तैयार हैं क्यूंकि 2019 का लोकसभा चुनाव आने वाला है| ऐसे में आप किसी भी खबर या जानकारी को आगे बढ़ाने से पहले रुकिए और उसकी तथ्यता को पड़खिये, अगर सही लगे तो आगे तक बढ़ाइए|










